हरे कृष्णा!
श्याम दीवानी हो के, जग में मैं आई हु
तेरी धुन लगा के श्यामा, चरणों मे मैं आई हु
मन मे भी तुम हो, तन में भी तुम ही
मथुरा के पेडे भी, तेरे लिए लाई हु
होली का त्योहार तुमने, ब्रज में मनाया है
गोवेर्धन पर्वत भी, उंगलियों पे उठाया है
द्वारका पे राज तुमने, कान्हा जी चलाया है
गोपियो संग रास तुमने, कान्हा जी रचाया है
तेरे प्रेम की महक आज, दिल मे समाई मेरे
तेरी दीवानी हो के, खिंची चली आई मैं
यशोदा के लाल तुम हो, नंद जी के प्राण हो,
राधा जी के प्रेम हो, मीरा की तान हो,
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